काले कोट की काली करतूत – पुलिस से की अभद्रता

पुलिस की अजीब दुविधा है। पुलिस वाला झापड़ मार दे तो पुलिस की गुंडई और खुद अगर सब कुछ सह कर कानून का पालन कर आए तो कायर समझा जाता है।

प्रभाकर चौधरी बेहद शानदार और निर्भीक अफसर है। उत्तर प्रदेश के उन आईपीएस अफसरों में से हैं जिनके पीछे पुलिस फोर्स हर परिस्थिति में खड़े रहना चाहती है और खड़ी होती है।

सीतापुर में आज जो कुछ हुआ यह प्रभाकर चौधरी की सख्ती की वजह से हुआ। थानों में नेता और दलालों की चाहे वह किसी भी रूप में हो उनकी दाल नहीं गल रही। इसी का नतीजा है की अराजकता का अड्डा बन चुके सीतापुर क्लब के मुद्दे पर वकीलों ने sp और साथी दरोगा को टारगेट किया।

उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके हैं वकीलों ने कप्तान से तक बदसुलूकी की। उनका फ़ोन छीनने की कोशिश की। 

 

ETV Bharat के पत्रकार संतोष कुमार ने बातचीत में बताया की  प्रभाकर चौधरी एक बेहद शालीन अफसर और समझदार होने का परिचय दिया है। बस अब जरूरत है ऐसे सफेद बाल वाले बुजुर्ग वकीलों को कानून का पाठ पढ़ाने की। और यह जरूरत सिर्फ सीतापुर में ही नहीं प्रदेश भर में गुंडई करने वाली वकीलों पर कार्रवाई की है सीतापुर की इस घटना पर बात उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया #dgp को बार काउंसिल से और सरकार से करनी चाहिए। जिस न्याय के मंदिर में आम लोगों को न्याय की उम्मीद होती है उस न्याय के मंदिर के कथित पुजारी ही बंटाधार कर रहे हैं।

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